सांप्रदायिक शक्तियों के ख़िलाफ़ अचल-अडिग डटे रहने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व देश के पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद का आज 71वाँ जन्मदिन है। मनुस्ट्रीम मीडिया जिन्हें ‘चाराचोर’ के नाम से बदनाम करती है, उन्हें मैं 6 विश्विद्यालय खोलने वाले मुख्यमंत्री के तौर पे जानता-मानता-सराहता हूँ। अगर रीढ़ वाले नेताओं की गिनती इस देश में होगी, तो लालू प्रसाद का नाम उस फ़ेहरिस्त में सबसे ऊपर आएगा। बिना डिगे फ़िरकापरस्ती से जूझने का माद्दा रखने वाले, पत्थर तोड़ने वाली भगवतिया देवी, जयनारायण निषाद, ब्रह्मानंद पासवान, आदि को संसद भेजने वाले, खगड़िया स्टेशन पर बीड़ी बनाने वाले विद्यासागर निषाद को मंत्री बनाने वाले, आज़ादी के 43 वर्षों के बीत जाने के बाद भी बिहार जैसे पिछड़े सूबे में समाज के बड़े हिस्से के युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने हेतु 6 नई युनिवर्सिटी खोलने वाले लोकप्रिय, मक़बूल व विवादास्पद नेता लालू प्रसाद की सियासत को 1995 से क़रीब से देखने-समझने की कोशिश करता रहा हूँ। लालू प्रसाद ने 90 की शुरूआत में यह साबित किया कि जमात की राजनीति से अभिजात्य वर्ग के वर्चस्व को चुनौती देकर समाज में समता व बंधुत्...