जीवन के पथ पर ओ राही तुमको मिलों चलना है
पांच साल पहले राबर्ट फ्रॉस्ट से प्रेरित हो कर ये कविता लिखी थी ...
ये क्या की इक ठोकर में ही ,
रुक कर के घबराते हो,
रण में पाँव धरे बिना ही,
पीछे को हट जाते हो,
अभी शौर्यगाथाये लिख कर,
तुम्हे इतिहास बदलना है,
जीवन के पथ पर ओ राही,
तुमको मीलो चलना है.
माना कि तन क्षीण हुआ ,
मन में दुविधा भर आई है,
पर क्या बोलो धरा कभी,
रुक कर के यूँ सुस्ताई है,
कंधो पर ले भार तुम्हे,
अंतिम क्षण तक बस चलना है ,
जीवन के पथ पर ओ राही,
तुमको मीलो चलना है.
याद तुम्हे मधुर क्षणों की,
रह रह कर तड़पाएगी ,
तुम्हे तुम्हारे लक्ष्यमार्ग से,
पीछे को लौटाएगी ,
किन्तु कहाँ धारा गंगा की,
पुनः हिमालय लौटी है,
गंगा सा अविरल तुमको नित,
बहते ही बह चलना है,
जीवन के पथ पर ओ राही,
तुमको मीलो चलना है.
सुख को छोड़ा , चैन गंवाया,
अगणित तुमने त्याग किये,
दुनिया जब हसती-मुस्काती,
तुमने तब संताप किये,
धीर धरो तुम सहन करो,
इक दिन सबकुछ बदलना है,
जीवन के पथ पर ओ राही,
तुमको मीलो चलना है.
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