ज्योतिबा जीवन कथा ..5

जुन्नर के किसान और ज्योतिबा ..

ज्योतिबा के समय , जुन्नर में खेती-किसानी पूरी तरह से ब्राह्मण ज़मींदारों और साहूकारों के हाथ में थी । ये साहूकार और जमींदार गरीब किसानों , मज़दूरों और जरूरतमंदों को अलग अलग तरीके से लूटा करते थे । इससे तंग आकर जुन्नर क्षेत्र के किसानों ने सरकार के पास यह अर्जी दायर की कि उन्हें जमींदारों और साहूकारों से बचाया जाए । उनके हितों की रक्षा किया  जाय ।

सरकार ने उनकी प्रार्थना पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया । तब ज्योतिबा ने गरीब , मज़दूर और किसानों को इकठ्ठा किया । उन्हें हिम्मत दी और एकता का महत्व समझाया । परिणामस्वरूप , किसानों ने भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाते हुए सालभर ज़मीन परती रखी । उन्होंने पूरे क्षेत्र में हल चलाना बंद कर दिया । जमीन जोतना बंद कर दिया ।

घबराये जमींदार और साहूकारों द्वारा ज्योतिबा पर तमाम दबाव बनाए गए , लेकिन वो झुके नहीं । ज्योतिबा किसानों के सच्चे नेता थे । उन्हें झुकने की बजाय संघर्ष करना आता था । 

कुछ समय बाद सरकार , जमींदार और साहूकार , तीनों को झुकना पड़ा । इनकी ज्योतिबा के साथ सुलह हुई और सरकार को किसानों के हित के लिए बाकायदा 'एग्रीकल्चर ऐक्ट ' पास करना पड़ा ।

आश्चर्य की बात है कि बालगंगाधर तिलक और रानाडे जैसे नेता उस समय साहूकारों के पक्ष में थे । उन्होंने ज्योतिबा की  निंदा की और साहूकारों का खुलकर साथ दिया । उस समय प्रकाशित होने वाले ' इंदुप्रकाश ' नामक अखबार ने भी ज़मींदारों का पक्ष लेते हुए ज्योतिबा की आलोचना की ।

लेकिन इसके बावजूद भी ज्योतिबा के नेतृत्व में गरीबों , किसानों और मज़दूरों की जीत हुई । यह उक्त अखबार और नेताओं की पक्षधरता से ज्यादा महत्वपूर्ण और सुकूनदायक बात थी ।

क्रमशः ...

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