' वर्तमान डिजिटल ट्रेड बनाम भावी डिजिटल वर्ल्ड , वॉर , टेरिज्म & सिक्योरिटी '
आज से पचास साल आगे सोच कर देखिए-
मार्किट में उपलब्ध हर तरह की वस्तु और सेवा इंटरनेट पर उपलब्ध है । आपकी पहचान , बैंक अकाउंट , जरूरी डॉक्यूमेंट सब कुछ इंटरनेट पर सुरक्षित है । कागज के नोट चलन से बाहर हो चुके हैं । हर तरह की मीटिंग , कांफ्रेंस , पढ़ाई -लिखाई आदि सब कुछ इंटरनेट से जुड़ चुकी है । सांस लेने , खाने-पीने , बच्चे पैदा करने और मल-मूत्र विसर्जन जैसी बुनियादी क्रियाओं के अलावा आपके जीवन की सारी क्रियाएं इंटरनेट से सम्बद्ध हैं । सुविधा और सेवा के नाम पर खड़ा हुआ डिजिटल बाजार अपनी चरम अवस्था पर पहुंच कर "डिजिटल वर्ल्ड " का रूप ले चुका है और आगे उसके प्रसार की कोई संभावना नहीं बची है ।
फिर एक दिन आपको पता चलता है कि डिजिटल वर्ल्ड में कुछ भी सुरक्षित नहीं है । तमाम तरह के साइबर हमले हो रहे हैं , निजी और सार्वजनिक डेटा का गलत इस्तेमाल हो रहा है , सूचनाओं में फेरबदल हो रही है , उन्हें छुपाया , मिटाया या गलत तरीके से जनरेट किया जा रहा है , पैसे इधर से उधर किये जा रहे हैं , हर तरह के डेटा की चोरी हो रही है ...
मतलब ये की डिजिटल दुनिया से जुड़ी जितनी भी खामियां आप सोच सकते हैं सब किसी न किसी रूप में अचानक या समयांतराल के बाद , आपके सामने आनी शुरू हो जा रही हैं । सुरक्षा के सारे उपाय बेकार साबित हो रहे हैं और सुनने में आ रहा है कि ऐसी गलत हरकतों में व्यक्ति और सामाजिक समूह से लेकर बड़े-छोटे तमाम देश तक लिप्त पाए जा रहे है ।
संक्षेप में पूरी दुनिया आज के साइबर क्राइम से आगे बढ़कर " डिजिटल वार " और " डिजिटल टेरीरिज्म "की स्थिति में आ चुकी है ।
तब ? तब क्या होगा ?
मैं बताता हूँ क्या होगा ।
तब शुरू होगा दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल कंपनियों का व्यापार ।
जी हां ! सुरक्षा का व्यापार ।
इस व्यापार के नाम पर ऐसी मार्किट बनेगी जो आज होने वाले हथियार और अन्य वस्तु तथा सेवा के डिजिटल ट्रेड की तुलना में कहीं बड़ी होगी । जो आपसे डिजिटल खतरों से निपटने के नाम पर मनमाने तरीके से धन उगाही करेगी । अपनी कीमत और अपनी शर्तों पर । तब के " डिजिटल वर्ल्ड " में आपके पास उन्हें स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा । क्योंकि तब आप पूरी तरह इस डिजिटल वर्ल्ड के गिरफ्त में आ चुके होंगे । इस दुनिया में आप या आपकी सरकारों के तय करने से कुछ भी नहीं होगा । यहां वही होगा जो इस डिजिटल वर्ल्ड के सिरमौर चाहेंगे । जो इस डिजिटल वर्ल्ड के सुरक्षा तंत्र पर एकाधिकार रखने वाले चाहेंगे ।
इस पूरे सुरक्षा तंत्र पर उन देशों और वहां की कंपनियों का कब्ज़ा होगा जो सूचना और संचार के क्षेत्र में आज अग्रणी हैं । जो इस संकट को आज समझ रही हैं और भविष्य के संकट की जन्मदाता हैं । जो एक तरफ तो जीवन के हर पहलू को डिजिटल दुनिया से जोड़ रही हैं और दूसरी तरफ इस दुनिया के संभावित खतरों पर लगातार अनुसंधान कर रही हैं , करोड़ों - अरबों फूँक रही हैं । वो आज भले ही एक कंपनी या इंटरनेट सुविधा प्रदाता हो लेकिन भविष्य की सुपरपावर हैं । उनके बिना आपकी हैसियत जंगल में रहने वाले जानवर जितनी होगी । उनके बिना आप मनुष्य के रूप में सभ्यता से अलग रहने वाले आदिम मानव से अधिक कुछ नहीं होंगे ।
भविष्य में वही तय करेंगी की आपके जीवन की दशा और दिशा क्या होगी ।
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