ज्योतिबा जीवन कथा .7


हमें आमिर खान का शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि उन्होंने पहली बार ज्योतिबा के जल संरक्षण संबंधी प्रयासों को फेसबुक लाइव के माध्यम से लोगों के सामने लाने का काम किया ।

ज्योतिबा की यह पहल उस समय के अछूतों की समस्या से जुड़ी हुई है । पूना में उस समय स्थान स्थान पर पीने के पानी के छोटे बड़े हौज हुआ करते थे , जिन पर पेशवाओं का अधिकार होता था । इन हौज पर महार , चमार , भंगी आदि शुद्र जाति के लोग पानी नहीं भर सकते थे । तपती दुपहरी में कई बार वे पानी के लिए प्रार्थना करते हुए , हौज से थोड़ी दूर पर दम तोड़ देते थे लेकिन उन्हें पानी की एक बूंद भी नहीं मिलती थी । अक्सर पड़ने वाले सूखे या गर्मियों में होने वाली पानी की कमी के कारण हर साल किसी न किसी घर से कोई न कोई जरूर मरता था । उस समय की नगरपालिका भी कोई स्थायी इंतज़ाम नहीं कर पा रही थी ।

पानी की कुछ बूंदों के लिए अछूतों की जो हालत थी उसे देखना और सहना ज्योतिबा के लिए संभव नहीं था । 1868 में उन्होंने अपने घर के पास हौज की स्थापना की और उसे अछूतों के लिए खुला कर दिया । वहां कोई भी किसी भी समय आकर पानी पी सकता था ।

उन्होंने अछूतों को जल संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया । उन्हें  छोटे -बड़े जलाशयों , घर पर पानी इकठ्ठा करने की तकनीकों तथा पानी बचाने के तरीकों के बारे में सिखाया । इसके अलावा ज्योतिबा ने 'जल-नीति' का विकास भी किया और ब्रिटिश सरकार से इसे लागू करने का अनुरोध किया ।  स्थानीय स्तर पर उन्होंने 'जल-नीति' का अध्ययन किया और किसानों को मिट्टी और खनिजों के क्षरण के बारे में शिक्षित किया । उनका महत्वपूर्ण सुझाव सिंचाई के लिए 'टैप सिस्टम' को लेकर था जिसे इज़राइल ने 1948 में अपने यहाँ लागू किया ।  सिंचाई के 'टैप सिस्टम' द्वारा न केवल मिट्टी और खनिजों का क्षरण रोका जा सकता है बल्कि जल का भी अधिकतम उपयोग किया जा सकता है ।

जल संरक्षण संबंधी उनके इन प्रयासों का आज भी महाराष्ट्र में उल्लेख किया जाता है । आमिर खान की पहल भी इसी से प्रेरित लगती है जिसका उल्लेख उन्होंने अपने फेसबुक लाइव में किया था ।

हर बार की तरह इस बार भी ज्योतिबा के इन कार्य की  सनातनियों द्वारा तीखी आलोचना हुई थी । लेकिन ज्योतिबा कब मानने वाले थे । उन्हें तो ऐसा हर काम डंके की चोट पर करना था , जो पारंपरिक अन्यायपूर्ण रूढ़ियों को तोड़ सके ।

क्रमशः ..

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